इस महीने पूरा हो जाएगा टनल निर्माण का कार्य: 17 साल पहले शुरू हुई थी परियोजना, किसानों को मिलेगा लाभ

जनमत हिन्दी। कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में लगभग 17 साल बनाई जा रही 11.95 किलोमीटर लंबाई की  देश की सबसे लंबी वॉटर टनल का निर्माण जल्द ही पूरा होने वाला है। वॉटर टनल का निर्माण पूरा होने में अब सिर्फ 108 मीटर खुदाई का कार्य बाकी है। जून के अंत तक यह कार्य पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद बरगी बांध से पानी पहली बार रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिले की 1.85 लाख हेक्टेयर जमीन तक पहुंचेगा। कटनी जिले को पीने का पानी भी मिलेगा।  जमीन से 30 मीटर नीचे बन रही इस सुरंग को बनाने में इंजीनियरों को 17 साल लग गए। कभी मशीनें जवाब दे गईं, कभी मीथेन गैस निकल आई। कभी भूजल ने रास्ता रोक लिया। यही वजह है कि परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण जल-सुरंग परियोजनाओं में गिनी जाती है। 17 साल से चल रही इस परियोजना 30 जून 2026 तक पूरी होने की प्रबल संभावना बताई जा रही है। विंध्य क्षेत्र की 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि  टनल के अंतिम छोर पर 100 मीटर से ज्यादा लंबी जर्मन टनल बोरिंग मशीन काम कर रही है। यही मशीन आखिरी 108 मीटर की खुदाई कर रही है। तापमान और नमी इतनी ज्यादा है कि इस मशीन के सामने काम करने वाले मैकेनिक लगातार 3 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकते। लिहाजा उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है। यह मशीन सुरंग को स्थायी आकार भी देती है। बतादें कि यह परियोजना 2008 में शुरू हुई थी। जिसकी लागत 1500 करोड़ रुपए है, खुदाई में संगमरमर, चूना पत्थर, मिट्टी और विशाल बोल्डरों के मिश्रण मिले हैं, कई बार मशीन के महंगे कटर टूट गए। करीब 67 करोड़ रुपए मूल्य के कटर बदलने पड़े हैं। साल 2013 में मीथेन गैस का रिसाव हुआ था, जिसके बाद चार महीने तक  टनल का कार्य रोकना पड़ा था। करीब 100 करोड़ रुपए की अमेरिकन मशीन भी परियोजना की चुनौतियों के आगे टिक नहीं सकी।  टनल का व्यास 10.14 मीटर है। यानी तीन मंजिला इमारत जितनी ऊंचाई के बराबर चौड़ाई। अंदर 100 साल से ज्यादा उम्र वाले 50 ग्रेड सीमेंट के 1420 किलो वजनी रिंग्स लगाए गए हैं।


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