जनमत हिन्दी। जाति बिरादरी से ऊपर उठकर भारत माता को पुनः परम वैभव के शिखर पर पहुंचाने हेतु संघ के स्वयंसेवक समाज के साथ मिलकर प्राण प्रण से जुटे हैं।संघ की शाखा से व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण के लिए स्वयंसेवकों के शारीरिक मानसिक बौद्धिक विकास के लिए वर्गों के माध्यम से गुणों का विकास होता है।समाज में विभिन्न संस्थाएं, सामाजिक जन, मातृशक्ति एक साथ मिलकर राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए एक प्लेटफार्म पर एकत्र आए हैं, आज दुनिया भारत की और देख रही है भारत में युवा पीढ़ी बड़ी मात्रा में देश हित में कार्य करे इसलिए युवा को जागृत कर संस्कारित कर आगे बढ़ने के लिए हमें समाज परिवर्तन का माध्यम बनाना चाहिए। ये बातें आशय के उदगार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाकौशल प्रांत के प्रांत घोष वर्ग के समापन अवसर पर सह प्रांत प्रचारक श्रवण जी सैनी ने मुख्य वक्ता की आसंदी से व्यक्त किये।आपने संघ के इतिहास विकास और समाज परिवर्तन में संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर उमा निगम ने कहा कि जब भी देश में कोई जरूरत आती है या कोई संकट आता है तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से तन मन धन से लग जाते हैं संघ का यह शताब्दी वर्ष है, मेरा मानना है कि संघ को हजार वर्ष तक रहना चाहिए। स्वयंसेवक बचपन से ही निस्वार्थ भाव से एक सैनिक की तरह तैयार होते हैं और यही इस घोष वर्ग में दिख रहा है। उल्लेखनीय है कि महाकौशल प्रांत के 34 जिलों से घोष वर्ग में 95 स्वयंसेवकों ने सहभागीता करी। कार्यक्रम में क्षेत्रीय कीड़ा भारती के अधिकारी कौशलेंद्र,विभाग संघचालक विपिन तिवारी, विभाग कार्यवाह अमित कनकने,जिला संघ चालक डॉ अमित साहू, नगर संघचालक किशोर ओचानी तथा बड़ी संख्या में नगर के प्रबुद्ध नागरिक जन और मातृशक्ति उपस्थित रहे। आभार प्रदर्शन संजय त्रिपाठी ने और वर्ग के बारे में विस्तार से वर्ग कार्यवाह लक्ष्मण लोधी ने बताया।
संघ की शाखा से व्यक्ति निर्माण: जाति-बिरादरी से ऊपर उठकर भारत को परम वैभव तक पहुंचाना ही संघ का लक्ष्य, समाज परिवर्तन का माध्यम बनें युवा































































































Leave a Reply