जनमत हिन्दी। शहर में इन दिनों पत्रकारिता नहीं, बल्कि कथित पत्रकारों की ठेकेदारी की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। आरोप हैं कि कुछ लोग पत्रकारिता की साख को ढाल बनाकर विवादित मामलों में सौदेबाजी का खेल खेल रहे हैं। चर्चा यह भी है कि ये लोग केवल अपने नाम पर ही नहीं, बल्कि अन्य पत्रकारों का नाम लेकर भी कथित रूप से रकम वसूलते हैं, जबकि जिन पत्रकारों के नाम का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती। हाल ही में खनिज विभाग से जुड़े एक मामले ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। शहर में इन दिनों कुछ कथित पत्रकारों की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी हुई है। आरोप हैं कि विवादित मामलों में खबर प्रकाशित करने या न करने के नाम पर सौदेबाजी की जाती है। चर्चाओं के अनुसार, जैसे ही कोई संवेदनशील मामला सामने आता है, संबंधित पक्ष पर खबर प्रकाशित होने का दबाव बनाया जाता है और बाद में समझौते के नाम पर रकम तय कर ली जाती है।सबसे गंभीर आरोप यह है कि सौदेबाजी केवल अपने नाम पर नहीं, बल्कि कई अन्य पत्रकारों के नाम पर भी की जाती है। दावा किया जाता है कि अमुक पत्रकारों को भी राशि देनी होगी, जबकि जिनके नाम का उपयोग किया जाता है, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती। आरोप है कि यह पूरी राशि कथित तौर पर बीच में ही हड़प ली जाती है। हाल ही में खनिज विभाग से जुड़े एक मामले में भी ऐसी ही चर्चाएं सामने आई हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि खबर प्रकाशन का ठेका लेकर अपने और अन्य पत्रकारों के नाम पर रकम ली गई, लेकिन संबंधित पत्रकारों तक कोई राशि नहीं पहुंची। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि ईमानदारी से काम कर रहे पत्रकारों की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।
पत्रकारिता या ठेकेदारी: अपने अलावा दूसरे पत्रकारों के नाम पर भी वसूली, खनिज विभाग के एक मामले से चर्चाओं का बाजार गर्म






























































































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