जनमत हिन्दी। ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और आत्मविश्वास अब मध्यप्रदेश की राजधानी तक अपनी खुशबू बिखेरने जा रहा है। कटनी जिले के बड़वारा ग्राम पंचायत के रागनी स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल का स्टाल 28 फरवरी से 1 मार्च तक भोपाल के हाट बाजार में लगाया जाएगा। प्राकृतिक सुगंध, त्वचा-सुरक्षित गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूलता के कारण इस गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है। खास बात यह है कि समूह को स्थानीय स्तर पर ही लगभग 550 किलोग्राम हर्बल गुलाल का ऑर्डर मिल गया है। इन दिनों दीदियां दिन-रात मेहनत कर ऑर्डर पूरा करने में जुटी हैं, ताकि समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया हैं कि जिले के स्व-सहायता समूहों और स्थानीय उत्पादों के विक्रय और विपणन की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। ताकि स्व-सहायता समूहों की महिलाएं और दीदियां आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। वोकल फॉर लोकल की अवधारणा को फलीभूत करते हुए जिले में स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल का भोपाल में स्टाल लगने से इसकी बेहतर मार्केटिंग और ब्रांडिंग होगी। पहले सीमित आय साधनों पर निर्भर रहीं बड़वारा की महिलाएं आज प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयासों से एक सफल लघु उद्यम चला रही हैं। आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को उत्पादन तकनीक, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद समूह ने फूलों, हल्दी, चुकंदर, पालक, गाजर और अन्य वनस्पतियों से पूरी तरह प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार करना शुरू किया। यह गुलाल सुगंधित होने के साथ-साथ त्वचा के लिए सुरक्षित है, जिससे रासायनिक रंगों से होने वाली आंखों की जलन और त्वचा समस्याओं से भी बचाव होता है। हर्बल गुलाल के तौर पर पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित होली का संदेश दे रही समूह की दीदियों का कहना है कि इस प्रयास से उनकी आमदनी तो बढ़ेगी ही।साथ ही आत्मविश्वास भी मजबूत होगा। इससे वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा पाएंगी। जिला परियोजना प्रबंधक शबाना बेगम ने बताया कि रसायनयुक्त रंगों के दुष्प्रभावों को देखते हुए स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हर्बल गुलाल का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रागनी समूह की दीदियां 28 फरवरी से 1 मार्च तक भोपाल हाट बाजार में भी अपनी सहभागिता देंगी। बड़वारा की रागनी स्व-सहायता समूह की यह सफलता आज अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
राजधानी में महकेगा कटनी का गुलाल: हर्बल, सुगंधित और त्वचा अनुकूल होने से बढ़ी मांग, फूलों, चकुंदरों सहित वनस्पतियों से किया गया निर्माण












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