जनमत हिन्दी। भारत को इंडिया नहीं भारत कहो इंडिया व्याकरण की दृष्टि से नपुंसक वाचक संज्ञा है जबकि हिंदुस्तान या भारत जीवंत है भारत एक जीवंत राष्ट्र है इसलिए भारत में रहने वाले सारे हिंदू बराबर है सारी जातियां एक ही है सब में एक ही आत्म तत्व ईश्वर के रूप में विद्यमान है आज जो जातियों में हिंदू समाज बट रहा है वह हमारे देश के लिए घातक है सभी हिंदू एक होकर जाति के बंधन को तोड़कर भारत माता के प्रति अपनी श्रद्धा को अर्पित करें यही अपने हिंदू सम्मेलन को सफल करने के लिए हमें संकल्प लेना होगा। हमें एकता और संगठन के रूप में रहना चाहिए। हिंदू होने में गर्व का अनुभव करना चाहिए और सबके साथ समान व्यवहार यह इस नीति का पालन करना चाहिए संपूर्ण विश्व में भारत गर्व के साथ आज सीना ताने खड़ा है, इसलिए अब हमें जाति बंधनों को त्याग करके और भारत माता के लिए कार्य करना चाहिए। ये बातें विराट हिंदू सम्मेलन बरगवां बस्ती में मुख्य अतिथि के रूप में जगन्नाथ पुरी से पधारे पूज्य संत श्री श्री 1008 श्री इंदिरा रमण जी सरकार जी ने कहीं। कार्यक्रम में संत वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ रजनीश शास्त्री जी महाराज जी ने कहा कि यहां हम सब हिंदू सम्मेलन में आए हुए हैं हिंदू क्या है, हिंदू शब्द की जो व्याख्या है, वह दो शब्दों से मिलकर बना है – ही और इंदु,ही का अर्थ है हिमालय ,जो हिमालय जैसा उन्नत और स्थिर हो और इंदु यानी होता है चंद्रमा ,जो चंद्रमा के समान शीतल विचारधारा रखता है वह हिंदू धर्म है हम बहुत उदारवादी हैं दया भावी हैं धर्म को एक छोटे स्थान पर रखा जाता है किंतु जो सनातन धर्म है ना अद्यतन है ना पुरातन है बल्कि हमारा धर्म है वह सनातन है,विराट है, हम सबके मंगल की कामना करते हैं हम सबके सुख की कामना करते हैं। उल्लेखनीय है कि पूरे देश भर में वर्तमान में हिंदू सम्मेलन हो रहे हैं अपने महाकौशल प्रांत में भी कटनी जिले में 132 हिंदू सम्मेलन हो रहे हैं उसी श्रृंखला में कटनी नगर की बरगवां बस्ती में आज हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ। मातृशक्ति वक्ता के रूप में बाल विदुषी संत स्तुति दुबे ने मातृ शक्तियों से आह्वान किया कि वह मंदिर में आरती में अवश्य जाएं और प्रत्येक घर हिंदू घर हो तथा बच्चों में अपने धर्म के प्रति रुचि जगे और संस्कारवान होते हुए अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित हों।मुख्य वक्ता के रूप में समाजसेवी चंदन यादव जी ने संघ के इतिहास विकास और संघ की समाज में भूमिका तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। आपने हिंदू शब्द की व्याख्या करी।सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर की लोकगीत गायिका श्री मति शांति पटेल जी ने और शिवम गौतम जी मंडली के द्वारा भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत माता की आरती गौ माता का पूजन धरती माता का पूजन कन्या पूजन और तुलसी का पूजन हुआ तथा 11 कन्याओं के पूजन के साथ कार्यक्रम का विधिवत्त शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देशभक्ति सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति हुई तथा नाटक के माध्यम से पञ्च परिवर्तन के विषय को रखा गया। कार्यक्रम का संचालन सूर्यकांत गौतम ने और आभार प्रदर्शन रवि नायक ने किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति तथा प्रबुद्ध नागरिक जन उपस्थित रहे, कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण सहभोज के साथ हुआ।
“इंडिया नहीं, भारत कहो” का संदेश: भारत जीवंत राष्ट्र है, सभी हिंदू एक समान हैं, जातियों में बंटता हिंदू समाज देश के लिए घातक












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