जनमत हिन्दी। कटनी जिले के बहोरीबंद स्थित राज्य सरकारी विपणन संघ मर्यादित खाद वितरण केंद्र पर किसानों की दुर्दशा अब किसी से छिपी नहीं रही। बहोरीबंद तहसील के सैकड़ों गांवों के किसान इसी केंद्र से मिलने वाली खाद पर निर्भर हैं, लेकिन हालात यह हैं कि किसानों को समय पर खाद मिलना अब संघर्ष बन गया है। स्थिति इतनी भयावह है कि किसान एक दिन पहले ही गोदाम के बाहर कतार में नंबर लगाकर, पूरी रात कड़ाके की ठंड में में खुले आसमान के नीचे इंतजार करने को मजबूर हैं। बीते दिन सुबह करीब 4 बजे गोदाम परिसर का नजारा खुद सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता की गवाही दे रहा था। लंबी कतारों में खड़े किसान, ठिठुरते शरीर और आंखों में मायूसी किसानों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। किसानों ने बताया कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर साल यही हाल है। रात में नंबर लगाओ, सुबह कहीं जाकर खाद मिलती है। मजबूरी में रातभर यहीं रुकना पड़ता है, किसानों ने आक्रोश भरे स्वर में कहा। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर बहोरीबंद और बाकल क्षेत्र के किसान खाद जैसी बुनियादी जरूरत के लिए रातभर ठंड में जागने को मजबूर हैं। यह दृश्य खुद सरकारी दावों की सच्चाई बयान करने के लिए काफी है। समय पर खाद न मिलने के कारण किसान फसलों में आवश्यक खाद का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं,जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ रहा है। नुकसान का बोझ किसान झेल रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि किसानों की इस पीड़ा को देखने-सुनने वाला कोई नहीं। न तो व्यवस्था में सुधार के प्रयास दिखाई दे रहे हैं और न ही किसानों से संवाद की कोई पहल अब तक किसी के द्वारा नहीं की गई है। सवाल यह है कि क्या किसानों की मजबूरी अब व्यवस्था के लिए महज एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागें, अन्यथा किसानों का यह सब्र कभी भी बड़े आक्रोश में बदल सकता है।
कटनी में खाद के लिए रतजगा: ठंड में ठिठुरते हुए कतार में लग रहे किसान, जिम्मेदार उदासीन, नहीं दे रहे ध्यान












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