जनमत हिन्दी। कटनी नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी अमले की हालिया कार्रवाई के बाद एक बुजुर्ग महिला का भावुक वीडियो सामने आया है। वीडियो में महिला रोते हुए अपनी आपबीती बताते हुए कह रही है, “हम तो बर्बाद हो गए… हमारा सब सत्यानाश हो गया। बताओ अब हम क्या खाएंगे? दिन भर मेहनत करके दुकान लगाते हैं, लेकिन सब छीन लिया…”
बताया गया कि महिला सड़क किनारे सब्जियां बेचती है। कार्रवाई के बाद सड़क किनारे बिखरी सब्जियों और रोती हुई महिला का दृश्य सामने आया। दावा है कि यह महिला हर सुबह करीब 100 किलोमीटर का सफर तय कर कटनी आती है और सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करती है।
इस घटना के बाद नगर निगम की अतिक्रमण कार्रवाई के तरीके, पारदर्शिता और छोटे व्यापारियों के लिए उपलब्ध विकल्पों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हॉकर्स जोन की व्यवस्था पर सवाल
‘स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम’ के तहत छोटे व्यापारियों के पुनर्वास और उन्हें विकल्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि कटनी में नगर निगम द्वारा बनाए गए हॉकर्स जोन वेंडरों की संख्या के सामने पर्याप्त नहीं हैं।
यह भी आरोप लगाया गया है कि जिन स्थानों को हॉकर्स जोन के रूप में तय किया गया है, वहां ग्राहक नहीं पहुंचते और पानी तथा शेड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बिना व्यावहारिक विकल्प दिए सीधे जब्ती की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अचानक कार्रवाई से छोटे वेंडर प्रभावित
यातायात व्यवस्था बनाए रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है, लेकिन आरोप है कि लगातार मॉनिटरिंग और व्यवस्थित व्यवस्था बनाने के बजाय समय-समय पर अचानक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाता है।
इसका असर उन छोटे वेंडरों पर पड़ने की बात कही गई है, जो रोजाना कर्ज लेकर या अपनी सीमित पूंजी लगाकर सब्जियां खरीदते हैं।
महिला से झूमाझटकी का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान बुजुर्ग महिला अमले के सामने गिड़गिड़ाती रही। आरोप है कि इस दौरान झूमाझटकी और अमानवीय व्यवहार किया गया तथा उसकी सब्जियां जब्त कर ली गईं।
अतिक्रमण विरोधी दस्ते पर अभद्रता के आरोप पहले भी लगाए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
जब्ती प्रक्रिया और रिकॉर्ड पर भी सवाल
कार्रवाई में जब्ती की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। नियमानुसार जब्ती की स्थिति में पंचनामा (जब्ती सूची) बनाए जाने और उसकी एक प्रति संबंधित व्यक्ति को दिए जाने की बात कही गई है।
जब्त की गई सब्जियों और अन्य सामान का क्या किया जाता है, इसे लेकर भी सवाल उठे हैं। क्या जब्त सामान की नीलामी होती है, उसे गौशाला भेजा जाता है या उसका कोई अन्य उपयोग होता है—इस संबंध में रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की मांग उठाई गई है।
रसूखदारों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल
गोल बाजार, साधुराम स्कूल और सुभाष चौक क्षेत्र में सड़क तक सामान फैलाने वाले बड़े रसूखदारों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ऐसे मामलों में अपेक्षाकृत खामोशी रहती है, जबकि कार्रवाई का असर छोटे और असहाय वेंडरों पर अधिक पड़ता है।
अतिक्रमण हटाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन गरीब वेंडरों को पर्याप्त विकल्प उपलब्ध कराने, जब्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कार्रवाई के दौरान मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
निष्पक्ष जांच और क्षतिपूर्ति की मांग
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहरवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही बुजुर्ग महिला को राहत और क्षतिपूर्ति देने तथा जब्ती की एसओपी (SOP) सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

































































































Leave a Reply