थाना परिसर में आत्मदाह का प्रयास: 90 प्रतिशत झुलसा ऑटो चालक, पुलिस विभाग में हड़कंप

जनमत हिन्दी। कटनी जिले के कुठला थाना परिसर में शुक्रवार को दलपत पटेल नामक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। घटना में दलपत पटेल करीब 90 प्रतिशत तक झुलस गया है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश और तनाव का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दलपत पटेल का बेटा चोरी के एक मामले में पहले से जेल में बंद है। आरोप है कि पुलिस इस मामले में दलपत पटेल की पत्नी यानी युवक की मां को भी आरोपी बनाने की तैयारी कर रही थी। इसी बात से आहत और परेशान होकर दलपत पटेल शुक्रवार को कुठला थाने पहुंचा।

बताया गया है कि थाने पहुंचने के बाद दलपत पटेल ने अचानक खुद पर पेट्रोल डाल लिया और आग लगा ली। थाना परिसर में अचानक हुई इस घटना से अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में आग बुझाई और गंभीर हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया।

घटना के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का प्राथमिक रुख यह बताया जा रहा है कि दलपत पटेल ने दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया। हालांकि, परिजनों और स्थानीय लोगों की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं।

परिजनों और स्थानीय लोगों में चर्चा है कि पुलिसिया कार्रवाई और पूरे परिवार पर बनाए जा रहे दबाव के कारण दलपत पटेल इस स्थिति तक पहुंचा। उनका सवाल है कि यदि व्यक्ति थाना परिसर में अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा रहा था, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका।

घटना की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ जाती है कि खुद को आग लगाने की घटना थाना परिसर के भीतर हुई। यह सवाल उठाया जा रहा है कि दलपत पटेल अपने ऊपर पेट्रोल डालने और आग लगाने की स्थिति तक कैसे पहुंच गया और उस समय किसी ने उसे रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया।

इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्रवाई और पूरे मामले की परिस्थितियों को लेकर पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाना जरूरी है।

मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दलपत पटेल ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया और घटना से पहले थाने में क्या-क्या हुआ था। पुलिस के रुख, परिजनों के आरोप और घटना की परिस्थितियों के बीच वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आने के लिए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है, ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियां और जिम्मेदारी से जुड़े सभी सवाल स्पष्ट हो सकें।

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