जनमत हिन्दी। जिले में बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने यह निर्देश कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला बाल और किशोर श्रम टास्क फोर्स की बैठक में अधिकारियों को दिए। उन्होंने बाल श्रमिकों की पहचान, बचाव, दोषी नियोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की हिदायत दी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर भी मौजूद रहीं। बैठक में कलेक्टर ने ने कहा कि किसी भी बच्चे का स्थान कारखानों, दुकानों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नहीं, बल्कि स्कूल और परिवार के सुरक्षित वातावरण में होना चाहिए। उन्होंने जिले में बाल श्रम के विरुद्ध व्यापक और परिणाममूलक अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि बाल श्रम के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए। कलेक्टर ने श्रम विभाग, पुलिस, महिला और बाल विकास, शिक्षा और अन्य संबंधित विभागों के संयुक्त दल गठित कर शहर, ग्रामीण क्षेत्रों के होटल, ढाबों, कार्यशालाओं, औद्योगिक इकाइयों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी बाल श्रमिक पाए जाएं, वहां तत्काल वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए कार्रवाई के अलावा जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाए। इसके लिए विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए लोगों को बाल श्रम कानून और उसके दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी जाए, ताकि समाज स्वयं इस बुराई के खिलाफ जागरूक होकर सहयोग कर सके। बैठक में बताया गया कि बाल और किशोर श्रम अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रतिबंधित कार्यों में नियोजित करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी नियोजक पर 20 हजार से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना, 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास या फिर दोनों प्रकार के दंड का प्रावधान है। समिति के सचिव और श्रम पदाधिकारी केबी मिश्रा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बाल श्रम कानून के विभिन्न प्रावधानों, टास्क फोर्स की भूमिका और बचाव, पुनर्वास की प्रक्रिया की जानकारी दी। बैठक में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की रणनीति पर भी चर्चा हुई। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है।
बाल श्रम रोकने चलेगा कार्रवाई अभियान: कलेक्टर ने कहा- प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार



































































































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