जनमत हिन्दी। भ्रष्टाचार और खाकी के रसूख के दुरुपयोग के मामले में घिरीं कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया का सबसे खौफनाक और चौंकाने वाला चेहरा सामने आया है। जांच रिपोर्ट और एफआईआर में दर्ज तथ्यों ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह एक पुलिस अधिकारी ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए एक नागरिक को उसके ही घर से अगवा जैसी स्थिति में रखा, थाने और अपने बंगले में बंधक बनाया और फिर अपनी सरकारी गाड़ी में ले जाकर 1 करोड़ 7 लाख की जमीन कौड़ियों के दाम लिखवा ली।
रंगनाथनगर थाने में अवैध रूप से रखा
जांच में खुलासा हुआ है कि जमीन सौदे से जुड़े आरोपी रमेश लोधी को अवैध रूप से हिरासत में रखने के लिए सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने पहले कोतवाली, कुठला और माधवनगर थाना प्रभारियों पर भारी दबाव बनाया था। हालांकि, तीनों थाना प्रभारियों ने बिना किसी कानूनी लिखा-पढ़ी के आरोपी को थाने में रखने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद सीएसपी ने रंगनाथनगर थाना प्रभारी अरुण पाल सिंह पर दबाव बनाकर आरोपी को थाने में अवैध रूप से रखवाया। इसी गलती के कारण रंगनाथनगर थाना प्रभारी को भी निलंबित किया गया है।
सरकारी गाड़ी से ले गए रजिस्ट्री ऑफिस
जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अनु बेनीवाल की रिपोर्ट के अनुसार, सीएसपी ने पीड़ित रमेश लोधी (निवासी कन्हवारा) को पूरी तरह अपने शिकंजे में ले लिया था। बंगले में अवैध कैद: थाने में रखने के बाद सीएसपी ने 15 अप्रैल 2026 को होने वाली रजिस्ट्री से पहले रमेश को लगातार दो दिनों तक अपने शासकीय आवास (बंगले) में बंधक बनाकर रखा। रजिस्ट्री वाले दिन पीड़ित कहीं भाग न सके या किसी से शिकायत न कर दे, इसलिए उसे अपनी आधिकारिक सरकारी गाड़ी में बैठाकर सीधा रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया।
शासकीय रिकॉर्ड के मुताबिक खसरा नंबर 2618/1 की इस जमीन का न्यूनतम सरकारी गाइडलाइन मूल्य 82 लाख रुपये था, जबकि वास्तविक सौदा 1 करोड़ 7 लाख रुपये में तय हुआ था। रमेश लोधी को झांसा देकर मात्र 15 लाख रुपये का चेक थमाया गया, जबकि शेष 92 लाख रुपये देने से साफ मुकर गए। आरोपी अधिकारी ने पीड़ित को भरोसा दिलाया था कि 7 दिनों के भीतर 15 लाख रुपये सीएसपी अपनी ‘दलाली’ रखेंगी और बाकी 75 लाख रुपये रमेश को लौटा दिए जाएंगे, लेकिन रजिस्ट्री होते ही उसे खाली हाथ भगा दिया गया।
- जमीन गंवाने के बाद जब पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की और पटवारी के पास नामांतरण रोकने का आवेदन दिया, तो सीएसपी ने रमेश पर दर्ज एक हत्या के केस का फायदा उठाते हुए धमकी दी कि यदि वह जेल से बचना चाहता है, तो उसे 75 लाख रुपये और देने होंगे। सीएसपी ने दावा किया कि यह रकम मिलने पर वह कोर्ट में बयान बदलवाकर उसे बरी करवा देंगी। पैसे देने से इनकार करने पर सीएसपी ने रमेश और उसके दामाद को झूठे मुकदमे में घसीटकर जेल भिजवा दिया। फिलहाल, मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद सीएसपी नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर कार्यालय सील कर दिया गया है। पुलिस की विशेष टीम फरार चल रही निलंबित सीएसपी और उनके सहयोगियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।


































































































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