करोड़ों खर्च के बाद भी बदहाल सुर्ख़ी डैम: टूटा ट्रेकिंग पाथ, बदहाल सीढ़ियां और बिखरी कुर्सियां, 9 साल पुरानी पर्यटन योजना पर सवाल

जनमत हिन्दी। कटनी शहर के प्रसिद्ध सुर्ख़ी डैम को पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की करीब 9 साल पुरानी 8 करोड़ 59 लाख की महत्वाकांक्षी योजना अब बदहाल व्यवस्थाओं के बीच सवालों के घेरे में है। योजना का उद्देश्य सुर्ख़ी डैम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र विकसित करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को सुविधाओं के बजाय असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
जलाशय के प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने और टहलने के लिए बनाया गया ट्रेकिंग पाथ जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। पाथ में गहरे गड्ढे होने के साथ बारिश का पानी और कीचड़ जमा है, जिससे फिसलन बढ़ गई है। निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और नियमित रखरखाव की कमी के आरोपों के बीच बच्चों और बुजुर्गों के लिए यहां पैदल चलना जोखिम भरा बताया जा रहा है।
डैम तक पहुंचने वाली सीढ़ियां भी बदहाल हैं। पर्यटकों के विश्राम के लिए लगाई गई कुर्सियां टूटकर बिखरी पड़ी हैं। परिसर में झाड़ियों का फैलाव और अव्यवस्था पर्यटन स्थल की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े कर रही है।
परियोजना की शुरुआत में सुर्ख़ी डैम को महज पिकनिक स्पॉट के बजाय एडवेंचर स्पोर्ट्स सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसमें जेट स्की, बनाना बोट, पैरासेलिंग, जिपलाइन, वॉटर स्कूटर और वॉटर रोलर जैसी गतिविधियां शुरू करने का प्रस्ताव था। इसके जरिए बाहरी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया था।
हालांकि, वर्तमान स्थिति में इन साहसिक गतिविधियों के शुरू होने से पहले ही पर्यटकों के लिए सुरक्षित पैदल आवागमन जैसी बुनियादी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
निर्माण कार्य में लापरवाही और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जल संसाधन विभाग संबंधित ठेकेदार का टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई कर रहा है। विभाग की ओर से की जा रही इस कार्रवाई ने निर्माण की निगरानी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
सवाल यह है कि निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियरों और पर्यवेक्षकों ने काम की गुणवत्ता की समय पर जांच क्यों नहीं की? यदि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप नहीं था, तो निर्माण एजेंसी को अब तक किस आधार पर भुगतान किया गया?
टेंडर निरस्त होने के बाद दोबारा प्रक्रिया शुरू करने और अधूरे काम को पूरा करने में कितना अतिरिक्त समय लगेगा और जनता के पैसे से कितनी अतिरिक्त राशि खर्च होगी, यह भी बड़ा सवाल है।

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