साहित्य के मंच से देशभक्ति का संदेश: ज्ञान, संस्कृति और साहित्य का संगम बना पुस्तक मेला, किताबों से दूर होती युवा पीढ़ी पर मंथन

जनमत हिन्दी। कटनी के साहित्य महोत्सव और पुस्तक मेले के दूसरे दिन गुरूवार को दोपहर एक बजे से पुस्तक विमोचन, पुस्तक समीक्षा और साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश उर्दु अकादमी संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ नुसरत मेहदी, मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र प्रचार प्रमुख श्रीमान कैलाश चंद्र शामिल हुए। शाम पांच बजे से काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। काव्य सम्मेलन में प्रमुख अतिथि के रूप में मप्र शासन के साहित्य अकादमी निदेशक श्रीमान प्रकाश दुबे, मुख्य वक्ता के रूप में मध्य क्षेत्र के सह क्षेत्र प्रचारक श्रीमान प्रेमशंकर सिदार और विशिष्ट अतिथि के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ राजेश वर्मा मौजूद रहे। इस अवसर पर वन्देमातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर सह क्षेत्र प्रचारक श्रीमान प्रेम शंकर सिदार द्वारा उद्बोधन दिया गया। अतिथियों द्वारा पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से किताबो और देश के इतिहास से दूर हो रही है उसके लिए हमे आगे आने की आवश्यकता है, बच्चों के अभिभावकों को उनके पठन काल से उन्हें किताबों के महत्व, भारत के पुराने इतिहास की जानकारी, योद्धाओं की गाथाएं, वीरंगनाओं की गाथाओं धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश की पुस्तकों के संबंध में बताना होगा, ताकि उनमें जिज्ञासा उत्पन्न हो।
इसके साथ ही उन्होंने भारत में सन्यासियों द्वारा आजादी के लिए किए गए युद्ध और संघर्ष की भी जानकारी दी गई। आगे उन्होंने कहा की पुस्तकों के अध्ययन से ही ज्ञान मिलता है, पुस्तक ही जीवन की रोशनी है, इसके बिना जीवन अधूरा है। साहित्यक आयोजन के साथ ही स्कूली छात्र-छात्राओं की रंगोली प्रतियोगिता भी पुस्तक मेले के दौरान आयोजित की गई। पुस्तक मेले में लगाई गई स्वदेशी स्टॉलों और पुस्तक दुकानों में लोगों की भीड़ भी देखी जा रही है। पुस्तक मेले में मधुवनी कला की सामग्री, खादी भंडार, आयुर्वेदिक औषधि स्टाल भी लगाए गए हैं। कार्यक्रम का संचालन विभाग कार्यवाह अमित कनकने द्वारा किया गया।

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