थाली नहीं, बाल्टी में भोजन: अस्पताल की भोजन व्यवस्था पर उठे सवाल, मरीजों की सेहत से खिलवाड़

जनमत हिन्दी। जिला अस्पताल में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को दिए जा रहे भोजन व्यवस्था में ठेकेदार द्वारा मनमानी की जा रही है। जिसे लेकर कलेक्टर से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला अस्पताल में मरीजों को दिया जाने वाला भोजन थाली में नहीं बल्कि बाल्टी में भरकर वार्डों में ले जाया जा रहा है। ऐसा करना न सिर्फ स्वच्छता नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और गंभीर बीमारियों को खुला निमंत्रण देने जैसा है। अधिवक्ता राज दुबे द्वारा की गई शिकायत में कहा गया है कि इस मामले में ठेकेदार को तीन बार नोटिस जारी किए गए हैं, बावजूद इसके में भोजन वितरण व्यवस्था में कोई सुधार नही हुआ है। जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा नोटिस जारी करने की औपचारिक कार्रवाई कर खानापूर्ति की गई है। संबंधित ठेकेदार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ठेकेदार पर न तो जुर्माना लगाया गया है और न ही ठेका निरस्त किया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन के बीच मिलीभगत का संदेह गहराता जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की निर्धारित मात्रा जानबूझकर कम दी जा रही है, डाइट चार्ट में शामिल फल और सलाद नियमित रूप से नहीं दिए जाते हैं, दूध और चाय, नाश्ते के समय और मात्रा में लगातार अनियमितता बनी हुई है, जिन मरीजों या परिजनों के पास बर्तन नहीं होते, उन्हें कई बार भोजन ही नहीं दिया जाता है, यह स्थिति किसी एक दिन की नहीं बल्कि कई महीनों से लगातार बनी हुई है। भोजन वितरण में सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है जिसके कारण कभी भी मरीज की जान को जोखिम में डाल सकता है। शिकायत में मांग की गई है कि अस्पताल में बिना पूर्व सूचना के अधिकारियों से आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। भोजन की मात्रा, गुणवत्ता और स्वच्छता की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने पर भोजन ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। शिकायत में कहा गया है कि भोजन वितरण व्यवस्था में की जा रही लापरवाही के कारण मरीजों के सेहत में विपरीत असर पड़ा तो उसकी जिम्मेदारी ठेकेदार के साथ अस्पताल प्रबंधन की भी होगी।

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